चंदन का तिलक क्यों लगाते हैं?

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चंदन का तिलकक्यों लगाते हैं?

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सनातन धर्म में चंदन के तिलक का काफीमहत्व है। पूजा-पाठ के साथ ही लोग आमदिनों में भी रोज चंदन का तिलक लगाते हैं।मान्यता है कि चंदन तिलक मृत्यु केबाद भी साथ रहता है।

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प्राचीन काल में बुजुर्ग बिना तिलक लगाएरात में सोते भी नहीं थे। वे मानते थे कि क्यापता मृत्यु कब आ जाए और माथे पर चंदनतिलक लगा रहेगा तो यमलोक में दुखनहीं भोगना पड़ेगा।

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प्राचीन ग्रंथों से पता चलता है कि पृथ्वीपर चंदन का अस्तित्व 4,000 साल सेज्यादा पुराना है। 3000 साल पहले मिस्र मेंदवा बनाने में चंदन का इस्तेमालहोता था।

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आयुर्वेदिक ग्रंथ 'चरक संहिता' में चंदनके फायदों के बारे में विस्तार सेबताया गया है।

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कई वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया कि जोलोग चंदन का तिलक लगाते हैं, उन्हें गुस्साकम आता है। चंदन का तिलक दिमाग को ठंडा रखता है।

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चंदन अपने चिकित्सीय लाभों के साथडिप्रेशन, टेंशन और अनिद्रा को दूरभगाने में कारगर है।

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श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया औरप्रशांत महासागर के आसपास के कईदेशों में भी चंदन पाया जाता है।

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15 साल के चंदन के पेड़ से सबसे अच्छाऔर सुगंधित तेल निकलता है। चंदन केतेल की क्वालिटी उसके पेड़ की उम्र औरउसके स्थान के हिसाब से अलग अलगहोती है।

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भारतीय चंदन का पेड़ 100 साल तक जीवितरहता है। पुराने पेड़ों में तेल की मात्रा सबसेअधिक होती है और उसकी गुणवत्ता भीसर्वोत्तम मानी जाती है।