जब आम की वजह से बेइज्जत हुआ पाकिस्तान

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जब आम की वजह से बेइज्जत हुआ पाकिस्तान

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हर किसी का पसंदीदा आम सिर्फ गर्मियों को खुशनुमा ही नहीं बनाता, बल्कि देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते सुधारने में भी मदद करता है।

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आम के साथ गुठलियों के दाम भी वसूल लेने की यह कूटनीति ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ कहलाती है।

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पाकिस्तान ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ के जरिए ताकतवर देशों को साधने की कोशिशें करता रहता है, लेकिन अक्सर उसे मात खानी पड़ती है।

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बात साल 1968 की है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री सैय्यद शरीफुद्दीन पीरजादा चीन के दौरे पर गए।

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उस वक्त तक चीन के लोग आम से अनजान थे। पाकिस्तानी विदेश मंत्री अपने साथ आम की 50 पेटियां भी ले गए।

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चीनी नेता माओ के सामने आम पेश किया गया, लेकिन पिलपिले आम देख माओ ने उन्हें छुआ तक नहीं।

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सारा आम चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के मेंबर्स को भेज दी गईं, जिसके बाद कॉमरेड्स के लिए आम माओ के प्यार का प्रतीक बन गया।

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कोरोनाकाल में पाकिस्तान ने एक बार फिर आम के बहाने अपनी खाली झोली भरने की कोशिश की।

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महामारी के दौरान जब सारी दुनिया वैक्सीन ढूढ़ रही थी, तब पाकिस्तान ने 32 देशों को चौसा आम भेजे।