निशान और घोंसलों से गिने जाते हैं मगरमच्छ

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निशान और घोंसलों से गिने जाते हैं मगरमच्छ

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भोपाल के केरवा और कलियासोत डैम में दूसरी बार मगरमच्छ की गिनती हुई है।

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मगरमच्छ को गिनना आसान काम नहीं है। इसके लिए बड़ी टीमों को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है।

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मगरमच्छ के मूवमेंट्स फूट प्रिंट, निशान और घोंसलों से उनकी गिनती की जाती है।

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ऐसा करते हुए काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। ताकि कोई मगरमच्छ छूट न जाए या किसी की दो बार गिनती न हो जाए।

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कई बार मगरमच्छ की गनती के लिए ड्रोन का भी सहारा लिया जाता है।

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इतनी मेहनत के बावजूद भी मगरमच्छों की असली संख्या का पता नहीं चलता।

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लेकिन उनकी आबादी के बारे में एक मोटा अनुमान जरूर हो जाता है।

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